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विभाग का इतिहास एवं संक्षिप्त परिचय

व्यापार एवं व्यवहार की पुरातन किन्तु जटिल वस्तु-विनिमय प्रणाली को पूर्णतया प्रतिस्थापित करते हुये आधुनिक माप-तौल व्यवस्था की स्थापना का मानव सभ्यता के विकास मे अमूल्य योगदान रहा है। यह आधुनिक मौद्रिक व्यवस्था एवं माप-तौल उपकरणो के प्रयोग से ही संभव हो सका है कि उपभोक्ता किसी भी वस्तु का मौद्रिक मूल्य भुगतान करके उसे अपनी आवश्यकतानुसार मात्रा मे खरीद सकता है। ऐसे मे उपभोक्ता की परम संतुष्टि के लिये यह आश्वस्त होना अनिवार्य है कि वह वस्तु की जितनी मात्रा के लिये मूल्य का भुगतान कर रहा है, बदले मे उसे वस्तु की उचित मात्रा ही प्राप्त होगी। अतः राज्य एवं सरकार का यह पुनीत दायित्व है कि व्यापार-व्यवहार मे प्रयुक्त होने वाले माप-तौल उपकरणो की यथार्थता को इस प्रकार नियमित व नियंत्रित करे कि जन-सामान्य का व्यवस्था मे अडिग विश्वास बना रहे।

हमे विदित होना चाहिये कि माप-तौल की आधुनिक व्यवस्था कोई एकल आविष्कार से नही जन्मी है, बल्कि भारत-वर्ष ही नही अपितु सुदूर देशों मे भी प्रचलित रही आदम व्यवस्थाओं को समेकित करते हुये यह क्रमिक विकास का परिणाम है कि दशमलव पद्धति पर आधारित वर्तमान माप-तौल प्रणाली को हम माप विज्ञान के रुप मे अपनाते हैं। वर्त्तमान में, अंतर्राष्ट्रीय वंशानुक्रम से तारतम्यता के अधीन राष्ट्रीय सरकारों की वैधानिक मान्यता के रहते इस व्यवस्था से विधिक माप विज्ञान के रुप मे सार्वजनिक विश्वास का अटूट रिश्ता स्थापित हो चुका है।

भारतवर्ष के अलग-अलग क्षेत्रों मे प्रचलित रही विविध किन्तु एक दूसरे से भिन्न मापने-तौलने की प्रणालियों के स्थान पर पूरे देश मे एक जैसी मापन व्यवस्था लागू किये जाने के उद्धेश्य से वर्ष 1956 मे भारतीय संसद द्वारा अधिनियम बनाया गया। इसी अनुक्रम मे उत्तर प्रदेश मे ‘मानक बाट तथा माप (प्रवर्तन) अधिनियम, 1959’ एवं नियमावली 1960 प्रख्यापित की गयी। पुराने अधिनियम के स्थान पर ‘मानक बाट तथा माप अधिनियम, 1976’ लागू कर इसके अधीन ‘मानक बाट तथा माप (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियमावली, 1977’ प्रख्यापित की गयी। कालान्तर में भारतीय संसद द्वारा उपभोक्ता हित संरक्षण को और व्यापक एवं प्रभावी बनाने की दृष्टि से ‘मानक बाट माप (प्रवर्तन) अधिनियम 1985’ बनाया गया, जो उ0प्र0 राज्य में 26 जनवरी, 1990 से लागू किया गया। उक्त अधिनियम के क्रियान्वयन हेतु ‘उ0प्र0 बाट और माप मानक (प्रवर्तन) नियमावली,1990’ प्रख्यापित की गयी। वर्तमान मे उपरोक्त के स्थान पर ‘विधिक माप विज्ञान अधिनियम 2009’ तथा प्रदेश मे इसके क्रियान्वयन हेतु ‘उ0प्र0 विधिक माप विज्ञान (प्रवर्तन) नियमावली, 2011’ प्रख्यापित की गयी है, जो दिनॉक 1 अप्रैल 2011 से प्रभावी है। अधिनियम 2009 के अंतर्गत पैकेज वस्तुओं के विनियमन के दृष्टिगत केंद्र सरकार द्वारा ‘विधिक माप विज्ञान (पैकेज वस्तु) नियमावली, 2011’ प्रख्यापित की गयी, जो कि दिनांक 01 अप्रैल, 2011 से प्रभावी है।

History & Brief Introduction of the Department

Establishing modern system of weighing & measuring has immensely contributed all through the evolution of human civilasation, in replacing ancient but cumbersome Barter system. It could come about only through the use of weighing & measuring instruments, along with modern monetary system, that the consumer is rendered to be able buying only that much as required quantity of his cherished commodity, after paying its monetary value. And as such, it is necessary to convince the consumer to his ultimate satisfaction, to the effect that he will get only the correct quantity of the commodity in exchange of his parted money. Therefore, it becomes the virtuous responsibility of the State and the government that the accuracy of weighing & measuring instruments is regulated and controlled in such a way that the public faith therein remains unshaken.

We must acknowledge that the modern system of weighing & measuring has not sprung out of the marvel of a single invention. Contrary to this, what we have adopted based on decimal system in the present as Metrology, is the result of gradual integration of ancient systems prevalent not only in territorial India but in the diversely situated countries. Today, in tandem with international hierarchy and under the recognition from respective national governments, the modern weighing & measuring system has succeeded in establishing an indestructible relationship with public trust.

In pursuit of bringing a single and uniform weighing & measuring system across the nation in place of various but different systems practiced in diversified territories of India, the parliament adopted an Act in 1956. As a follow up, Uttar Pradesh established 'Standards of Weights and Measures (Enforcement) Act, 1959' and Rules 1960 to enforce this Act. Later on, this Act was replaced by 'the Standards of Weights & Measures Act, 1976'. 'The Standards of Weights & Measures (Packaged Commodities) Rules, 1977' was established under this Act. Thereafter, in order to more effectively protect consumer interest, the Parliament adopted 'Standards of Weights and Measures (Enforcement) Act, 1985' which got adopted in Uttar Pradesh w.e.f. 26th January, 1990. And to enforce this new Act, 'Uttar Pradesh Standards of Weights and Measures (Enforcement) Rules, 1990' were notified. But, at present, 'the Legal Metrology Act, 2009' has replaced the previous Act. And to enforce this Act in our state 'Uttar Pradesh Legal Metrology (Enforcement) Rules, 2011' has been adopted w.e.f. 1st April' 2011. Again, in order to regulate and control the trade in pre-packaged commodities, 'the Legal Metrology (Packaged Commodities) Rules, 2011' were also adopted w.e.f. 1st April, 2011.




 

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